जीवामृत एक बहुत ही शक्तिशाली बायो-कल्चर (जीवाणुओं का घोल) है। इसका मुख्य काम मिट्टी को पोषक तत्व देना नहीं, बल्कि मिट्टी में सोए हुए करोड़ों मित्र जीवाणुओं (Microbes) और केंचुओं को जगाना और उनकी संख्या बढ़ाना है।
इसे बनाने के लिए आपको 200 लीटर का एक प्लास्टिक ड्रम और नीचे लिखी सामग्रियों की जरूरत होगी।
जीवामृत बनाने की सामग्री (200 लीटर के लिए)
देशी गाय का गोबर: 10 किलोग्राम (जितना ताजा हो उतना बेहतर)
देशी गाय का गोमूत्र: 5 से 10 लीटर (जितना पुराना हो उतना अच्छा)
गुड़ (Jaggery): 1 से 2 किलोग्राम (जीवाणुओं के भोजन के लिए)
बेसन या किसी भी दाल का आटा: 1 से 2 किलोग्राम (जीवाणुओं के प्रोटीन के लिए)
सजीव मिट्टी: एक मुट्ठी (किसी पुराने बरगद/पीपल के पेड़ के नीचे की या ऐसे खेत की मिट्टी जहां केमिकल न डाला गया हो)
पानी: लगभग 180 लीटर
बनाने की विधि
उपयोग करने का सही तरीका और सावधानियां
जमीन में देना (Drenching): तैयार जीवामृत को आप सीधे सिंचाई के पानी के साथ (Flood irrigation या Drip) खेत में दे सकते हैं। एक एकड़ के लिए 200 लीटर जीवामृत काफी होता है।
छिड़काव (Foliar Spray): अगर फसलों पर स्प्रे करना है, तो इसे कपड़े से बहुत अच्छी तरह छान लें। 10 लीटर पानी में 1 लीटर जीवामृत मिलाकर स्प्रे करें।
वैधता (Shelf Life): तैयार होने के बाद इसे 10 से 12 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लें। उसके बाद इसमें जीवाणुओं की संख्या कम होने लगती है।
जरूरी बात: जीवामृत को कभी भी तेज धूप में न रखें और न ही इसे हिलाने के लिए लोहे या प्लास्टिक के चमकीले डंडे का इस्तेमाल करें, हमेशा लकड़ी के डंडे का ही प्रयोग करें।
No comments:
Post a Comment