घनजीवामृत (Ghanajeevamrut) वास्तव में जीवामृत का ही सूखा रूप है। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पानी के साथ लिक्विड जीवामृत देने की सुविधा नहीं होती, या जो दूर दराज के खेतों तक लिक्विड ले जाने में असमर्थ होते हैं, उनके लिए घनजीवामृत सबसे बेहतरीन विकल्प है।
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे आप 6 महीने तक स्टोर करके रख सकते हैं।
घनजीवामृत बनाने की सामग्री
देशी गाय का सूखा या अर्ध-सूखा गोबर: 100 किलोग्राम
तैयार लिक्विड जीवामृत: 5 से 7 लीटर (या आवश्यकतानुसार, जिससे गोबर में नमी आ जाए)
देशी गाय का गोमूत्र: 2 से 3 लीटर (अगर गोबर बहुत सूखा हो तो)
बनाने की विधि
स्टोरेज (सुरक्षित रखने का तरीका)
तैयार घनजीवामृत को जूट के बोरों में भरकर किसी हवादार और छांव वाली जगह पर रखें।
इस पर सीधी धूप या बारिश का पानी नहीं पड़ना चाहिए।
इस तरीके से रखने पर आप इसे 6 महीने तक आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस्तेमाल का तरीका और मात्रा
मात्रा: एक एकड़ खेत के लिए 100 से 150 किलोग्राम घनजीवामृत काफी होता है।
कब डालें: खेत की आखिरी जुताई के समय इसे मिट्टी में बिखेर दें। या फिर फसल बोते समय इसे कतारों (Rows) में बीज के पास डालें।
जब भी खेत में नमी (सिंचाई या बारिश) होगी, इसमें मौजूद सुप्त जीवाणु (Dormant Microbes) तुरंत सक्रिय होकर मिट्टी को उपजाऊ बनाना शुरू कर देंगे।
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