Saturday, 11 July 2026

जीवामृत को घनजीवामृत (सूखी खाद) में बदलने का तरीका

 


        घनजीवामृत (Ghanajeevamrut) वास्तव में जीवामृत का ही सूखा रूप है। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पानी के साथ लिक्विड जीवामृत देने की सुविधा नहीं होती, या जो दूर दराज के खेतों तक लिक्विड ले जाने में असमर्थ होते हैं, उनके लिए घनजीवामृत सबसे बेहतरीन विकल्प है।

इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे आप 6 महीने तक स्टोर करके रख सकते हैं।

घनजीवामृत बनाने की सामग्री

  • देशी गाय का सूखा या अर्ध-सूखा गोबर: 100 किलोग्राम

  • तैयार लिक्विड जीवामृत: 5 से 7 लीटर (या आवश्यकतानुसार, जिससे गोबर में नमी आ जाए)

  • देशी गाय का गोमूत्र: 2 से 3 लीटर (अगर गोबर बहुत सूखा हो तो)


बनाने की विधि

1.गोबर को फैलाएं:स्टेप 1.

किसी पक्के फर्श पर या तिरपाल (Tarpaulin) बिछाकर छांव वाली जगह पर 100 किलो गोबर को अच्छी तरह फैला लें। अगर गोबर में बड़े ढेले हैं, तो उन्हें बारीक कर लें।

2.जीवामृत का छिड़काव करें:स्टेप 2.

अब पहले से तैयार 5 से 7 लीटर लिक्विड जीवामृत को इस गोबर के ऊपर चारों तरफ अच्छी तरह छिड़क दें। साथ ही गोमूत्र भी मिला दें।

3.अच्छी तरह मिलाएं:स्टेप 3.

फावड़े की मदद से या हाथों से (दस्ताने पहनकर) इस पूरे मिश्रण को ऊपर-नीचे करके अच्छी तरह मिला लें, जैसे हम सीमेंट-बजरी का मसाला मिलाते हैं। ध्यान रहे, गोबर सिर्फ नम (Moist) होना चाहिए, बहुत ज्यादा गीला या कीचड़ जैसा नहीं।

4.ढेर बनाकर ढकें:स्टेप 4 (48 घंटे).

पूरे मिश्रण को एक जगह इकट्ठा करके एक ढेर (Heap) बना लें। अब इस ढेर को जूट के बोरों (टाट की बोरियों) से पूरी तरह ढक दें और 48 घंटे (2 दिन) के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इससे इसके अंदर किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया तेज होगी और बैक्टीरिया करोड़ों की संख्या में बढ़ जाएंगे।

5.सुखाएं और बारीक करें:स्टेप 5.

48 घंटे बाद बोरों को हटा दें और इस मिश्रण को छांव में ही फैलाकर 2 से 3 दिन तक सुखाएं। जब यह सूख जाए, तो इसे डंडे से पीटकर या हाथों से मसलकर बारीक पाउडर जैसा बना लें। आपका घनजीवामृत तैयार है।

स्टोरेज (सुरक्षित रखने का तरीका)

  • तैयार घनजीवामृत को जूट के बोरों में भरकर किसी हवादार और छांव वाली जगह पर रखें।

  • इस पर सीधी धूप या बारिश का पानी नहीं पड़ना चाहिए।

  • इस तरीके से रखने पर आप इसे 6 महीने तक आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस्तेमाल का तरीका और मात्रा

  • मात्रा: एक एकड़ खेत के लिए 100 से 150 किलोग्राम घनजीवामृत काफी होता है।

  • कब डालें: खेत की आखिरी जुताई के समय इसे मिट्टी में बिखेर दें। या फिर फसल बोते समय इसे कतारों (Rows) में बीज के पास डालें।

  • जब भी खेत में नमी (सिंचाई या बारिश) होगी, इसमें मौजूद सुप्त जीवाणु (Dormant Microbes) तुरंत सक्रिय होकर मिट्टी को उपजाऊ बनाना शुरू कर देंगे।








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