भजन करो भोजन करो और दक्षिणा पाओ अभियान यह पूज्य पाद संत श्री आशाराम जी बापू का सम्पूर्ण देश भर में अनोखा प्रयास है | इस अभियान की तहत गरीव बनवासी पिछड़े इलाको में मतान्तरण का शिकार हो रहे लोगो को एक नयी चेतना मिला | देश भर के पिछड़े बनवासी इलाकों में सेवा एक सफल प्रयास शुरू हुआ | इस अभियान के तहत निवाई गौशाला में भी इस कार्य को अधिकाधिक बढाया गया |
भारत में गरीबी और वृद्धावस्था अक्सर एक दुखद संयोजन होता है। ऐसे में कई वृद्ध लोग, जो पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर हैं, अपने जीवन के आखिरी दिनों में पर्याप्त समर्थन और देखभाल से वंचित रहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, पूज्य पाद संत श्री आशाराम जी के आश्रमों एवं समितिओं द्वारा विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य देश भर में पिछड़े और बनवासी इलाकों में गरीव वृद्धों के जीवन को बेहतर बनाने का सफल प्रयास किया गया |।
इस अभियान का मुख्य ध्येय गरीव वृद्धों को न केवल शारीरिक सहायता प्रदान करना था , बल्कि उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक संबल भी देना है। अभियान की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
भजन और कीर्तन
इस अभियान के तहत, प्रत्येक दिन वृद्धों के लिए भजन और कीर्तन का आयोजन किया जाता है। भजन और कीर्तन से न केवल उनकी आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है, बल्कि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक भजन कीर्तन से मन की शांति प्राप्त होती है और वृद्ध लोग अपने दैनिक जीवन की चिंताओं से कुछ पल के लिए मुक्त हो जाते हैं।
एक समय का भोजन
अभियान के तहत दोपहर के समय वृद्धों के लिए एक समय का पौष्टिक भोजन भी प्रदान किया जाता है। यह भोजन उनकी शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उन्हें एक स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करता है। भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि वृद्ध लोग स्वस्थ और तंदुरुस्त रह सकें।
आर्थिक सहायता
भजन और भोजन के साथ ही, प्रत्येक दिन शाम को वृद्धों को 100 रूपये की दक्षिणा भी प्रदान की जाती है। यह आर्थिक सहायता उन्हें अपनी छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में सहायक होती है। वृद्ध लोग इस दक्षिणा का उपयोग अपनी दवाइयों, कपड़ों या अन्य आवश्यकताओं के लिए कर ते हैं। इससे उन्हें आत्मनिर्भरता का एहसास होता है और वे अपनी आवश्यकताओं को बिना किसी पर निर्भर हुए पूरा कर ते हैं।
अभियान का संचालन
यह अभियान देश भर के पिछड़े और बनवासी इलाकों में संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में 35 वर्ष से ऊपर के गरीव वृद्ध लोग भाग ले ते हैं। यह अभियान स्थानीय समिति , सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूज्य पाद संत श्री आशाराम जी बापू का साधकों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रत्येक इलाके में स्थानीय समितियों का गठन किया गया है, जो इस अभियान के संचालन और प्रबंधन का जिम्मा संभालती हैं।
समाज पर प्रभाव
इस अभियान का प्रभाव समाज के विभिन्न पहलुओं पर दिखाई दे रहा है। सबसे पहले, यह अभियान गरीव वृद्धों के जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वृद्ध लोग जो पहले असहाय और उपेक्षित महसूस करते थे, अब उन्हें एक नया जीवन मिलने का अनुभव हो रहा है। उनके चेहरे पर खुशी और संतोष की झलक दिखाई देती है।
दूसरा, इस अभियान ने समाज में एक नई जागरूकता और संवेदनशीलता को जन्म दिया है। लोग अब वृद्धों के प्रति अधिक सहानुभूति और संवेदनशीलता का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह अभियान समाज को यह संदेश देता है कि वृद्धों का सम्मान और देखभाल हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
सार बात
गरीव वृद्धों के लिए भजन, भोजन, और दक्षिणा का यह अभियान न केवल उनकी भौतिक जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक संबल भी प्रदान करता है। यह अभियान समाज में वृद्धों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के माध्यम से, हम एक ऐसा समाज बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं जहां हर वृद्ध व्यक्ति को सम्मान, देखभाल और समर्थन मिले।



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