Tuesday, 9 July 2024

गौशाला निवाई में कार्य क्रियान्वयन- एक विस्तृत विवरण

 




    पूज्य बापूजी के कथनानुसार गोमाता को हम नहीं पालते गोमाता हमें पालती है. इसी बात को चरितार्थ करते हुए गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु पंचगव्य उत्पादों, केचुआ खाद निर्माण व गोबर गैस संयंत्र द्वारा विद्युत निर्माण आदि कार्यक्रम प्रारंभ किये गये, इसी बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर कार्य प्रारंभ किया गया.

               निवाई गौशाला द्वारा प्रायोजित इस राष्ट्रव्यापी रचनात्मक तथा सृजनात्मक गोसेवा महाभियान की सुपरिणामकारी सफलता हेतु इसे सत्पुरुषों से अनुमोदित, विवेक के प्रकाश में निम्नलिखित 9 नौ चरणों में विभक्त किया गया।

1 गोसंरक्षण,2 गोपलन,3 गोसंवर्धन,4 पंचगव्य संकलन,परिष्करण एवं विनियोग,5 सत्संग,6 सत्संस्कार7 स्वास्थ्य,8 स्वावलम्बन 9पर्यावरण संरक्षण

1 -गौ -संरक्षण

      गौशाला  पहुँचने वाले प्रत्येक अनाश्रित,  अपंग, लाचार, दुर्घटनाग्रस्त एवं कत्लखानों में जाने से छुड़ाए गये गोवंश को सर्वप्रथम यहीं प्रवेश मिलता है। चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के पश्चात गोवंश को उनकी शारीरिक स्थिति एवं सेवा-सुश्रुषा की आवश्यकता के अनुसार बनाई गई विभिन्न श्रेणियों के विभागों में भेजा जाता है तथा गंभीर स्थिति वाले गोवंश को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलने तक विशेष ध्यान दिया जाता है। सभी गौशालाओं में गोमाता के उपचार हेतु गो चिकित्सा कक्ष व डॉक्टर की सुविधा है.\

,2- गोपलन

       गोमाताओं के लिए नेत्रहीनता, गर्भाशय, फेफड़ों, हड्डियों तथा कैंसर घाव आदि से सम्बन्धित सभी बीमारियों के अलग-अलग विभाग वर्गीकृत है। साथ ही भिन्न-भिन्न बीमारियों में दिए जा सकने वाले अलग-अलग तरह के भोजन निश्चित मापदण्डानुसार निश्चित समय पर बदल-बदलकर दिये जाते हैं। जहाँ सर्दियों में वृद्ध गोवंश को दोनों समय लापसी, मक्की, मेथी, अजवायन, सोआ, गुड़, तेल आद  खिलाया जाता है, वहीं गर्मियों में ठण्डे रहने वाले ‘‘जौ’’आदि खिलाये जाते हैं।

     

    गौ ओंको ठहर ने हेतु और वर्षों ,सर्दी, गर्मी से बचने हेतु  तथा गौओं के स्वास्थ्य , प्रकार ,जाती ,आदि आदि को ध्यान में रखतेहुए अलग अलग प्रकार की गौ आवास का निर्माण किया गया है | अवास अतिरिक्त चारा खाने की ठाण  और पानी  पिने की कुंड भी निर्माण किया गया है |

यहांपर  गो-चिकित्सा हेल्प लाईन के माध्यम से 1 मोबाईल एम्बुलेंस भी  सेवारत है।

3-गोसंवर्धन

     प्रतिवर्ष सैंकड़ों उन्नत नस्ल के नन्दी (सांड) तैयार करके देश के विभिन्न गोग्रामों एवं गोशालाओं को दिया जाता   है तथा गरीब किसानों को प्रतिवर्ष सैंकड़ों जोड़ी सशक्त एवं सुडौल बैल अत्यल्प शुल्क में उपलब्ध करवाता है। नाकारा सांडो को हजोरों की संख्या में गोसेवा केन्द्रो में प्रवेश दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त शताधिक  गिर ,थारपारकर आदि श्रेष्ठ कुलीन सांड उपलब्ध कराये जा रहे है जिससे एक साथ लाखों गायों का संवर्धन हो रहा है ।

4-पंचगव्य संकलन, परिश्करण एवं विनियोगः-

     सभी गोसेवाश्रमों में गोबर निर्मित जैविक खाद तैयार कर आस-पास के गोपालक किसानों को अल्प शुल्क में वितरित की जाती है।  गोबर से केंचुआ खाद का निर्माण होता है तथा ढ़गला खाद भी बनाई जाती हैद्वारा स्वस्थ गो-बछडि़यो के गोमूत्र से अर्क बनाया जाता है। गोमूत्र अर्क, गोमय, दही तथा गोघृत के संयोग से सर्वरोगहर पंचगव्य औशधियों का निर्माण तथा सस्ती दर पर वितरण किया जाता है। स्थानीय नागरिकों को  उचित मूल्य में दूध   वितरित होता है। समय समय पर तक्र (छाछ) गरीबों तथा अभाव ग्रस्तों में अल्प शुल्क पर वितरित की जाती है। यही नहीं औशध, यज्ञ, पूजा तथा अनुश्ठान के लिए शुद्ध गोघृत उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाया जाता है। कई स्थानों में पंचगव्य वितरण केन्द्र संचालित है ।

5- सत्संग:-

   गोपाश्टमी आदि उत्सवो पर देश के महान् संत-महात्माओं द्वारा गोमहिमा, पंचगव्य की पवित्रता पर सदुपदेश, सच्चर्चा,सत्कथा तथा सच्चिन्तन एवं योग के माध्यम से व्यक्ति, समाज व राश्ट्र का नैतिक, चारित्रिक एवं आध्यात्मिक उत्थान करवाने का विनम्र प्रयास किया जा रहा है। । सत्संग से सेवक का जन्म होता है और सेवक से सेवा का सम्पादन होता है। सत्संग की दिव्य भूमि से ही मानवता का अवतरण होता है। मानवता प्राप्त मानव ही अपने लिए,जगत तथा जगदीष्वर के लिए उपयोगी होता है। ऐसा सत्पुरुशों का अनुभव सिद्ध मत है इसलिए सत्संग अनुपम है। गौशाला के  इस प्रयास के पीछे यही पावन उद्देष्य है।

6-सत्संस्कार:-

    वृद्ध,अपंग,अशक्त गोवंश की सामूहिक सेवा,सुवृश्टि यज्ञ, जप-अनुश्ठान, उपवास, स्वाध्याय, गोवत्स एवं गोभक्त पाठषाला,, सत्साहित्य प्रकाशन व प्रचार-प्रसार, व्रतोत्सव आदि पर शिविर, सभाएँ एवं सम्मेलनों द्वारा गोसेवा, प्राणी रक्षा, मानव हितकारी पर्यावरण शुद्धता एवं राश्ट्र उत्थान के संस्कार प्रेशित किये जाते हंै।

7-स्वास्थ्य:-

     शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक रोगोपचार हेतु  परिसर में ही एक पंचगव्य प्राकृतिक योग चिकित्सा स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की गई है। चहाँ रोगियों के रोगों की जांच,परीक्षण व उपचार का प्रबन्ध है। पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य वाहन द्वारा गरीबों को निःशुल्क पंचगव्य औशधियों का वितरण किया जाता है। गोधाम की पंचगव्य औशधियों से हजारों रोगी स्वस्थ हुए हैं । बड़ी-बड़ी बीमारियों का शमन हुआ है तथा सब प्रकार के रोगियों का उपचार होता है। हमारे स्वास्थ्य केन्द्र पर अमीर-गरीब सभी निःसंकोच भाव से आकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


8-स्वावलम्बन:-गौशाला में समय-समय पर प्रदेश के ग्रामीण व शहरी किसानों को देते रहते है.

     स्वरोजगार तथा स्वावलम्बन हेतु वर्श में कई बार छोटे-बड़े प्रशिक्षण शिविर आयोजित होते हंै जिसमें व्यक्ति, परिवार एवं गांव को स्वावलम्बी बनाने की प्रक्रियाएँ गो-रक्षण, पंचगव्य उत्पाद निर्माण व् केचुआ खाद के संबंध में सिखाई जाती हंै। इन प्रशिक्षण शिविरों में से निकलकर सैकड़ों व्यक्तियों ने परिवार एवं गाँवों को स्वावलम्बी बनाने का सर्वहितकारी कार्य प्रारम्भ किया है।

9-पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षरोपण

   गौशाला क्षेत्र में नीम ,पिपल ,बड ,लेसुडे ,सिरिस ,सीसम  आदि छायादार   व फल दा र पेड़ जैसे आमला जामुन  निम्बू व अनार की कई हजार पेड़ लगा कर पर्यावरण की सुरक्षा  कर ने में  अग्रणी भूमिका निभाई है |

 गौशालाओं में गोबर व गौमूत्र द्वारा आवासित कर विभिन्न जड़ी-बूटियों का निर्माण गौशालाओं में किया जाता है.



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