संत श्री आशाराम जी गौशाला निवाई एक प्रसिद्ध गौशाला है जो राजस्थान राज्य के टोंक जिले में स्थित है जिसमे अभी 1250 गौ वंश हैं । यह गौशाला न केवल गायों की देखभाल के लिए समर्पित है, बल्कि यह स्थानिक लोगों के बीच सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सैक्षिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जागरूकता और गौसेवा के महत्व को भी प्रचारित करती है।
अवस्थिति
स्थान:
निवाई, जिला टोंक, राजस्थान, भारत पिन कोड 304021
Gps _ यहां प्राप्त करें
स्थापना:
सन 2000 में राजस्थान में भयंकर अकाल आया किसान गौवंश को संभालने में असमर्थ हुए इसका फायदा उठाकर गौतस्कर गाड़ी भर भर कर कतलखाना लेने लगे। स्थानीय गौभक्तों को यह सहन नहीं हुआ और गायों को एकत्रित करने लगे । परन्तु अकाल के प्रभाव में इन्हे संभालना असंभव प्रतित हुआ। फिर उस समय के प्रभावी संत श्री आशारामजी बापू के चरणों में यह विकट स्थिति वर्णन करने पर संत श्री आशाराम जी बापू द्वारा यह गौशाला स्थापित हुआ। जिसमे राजस्थान प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमान अशोक जी गहलोत जी का भी भूमि उपलब्ध कराने में सराहनीय भूमिका रहा।
Honorable former CM Shri Ashok ji Gehlot
with
P.P. Sant Shree Ashram Ji Bapu
उद्देश्य:
गौशाला का मुख्य उद्देश्य गायों की देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास है। इसके अतिरिक्त, यह गौशाला गायों से प्राप्त उत्पादों जैसे गोबर, गोमूत्र आदि का उपयोग करके जैविक खेती और पर्यावरणीय संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।
सुविधाएँ और सेवाएँ
1. गायों का आश्रय:
गौशाला में गायों के लिए व्यापक आश्रय व्यवस्था है, जिसमें उनके रहने, खाने और चिकित्सा की पूरी सुविधाएं हैं।
2. आहार और पोषण:
गायों को पौष्टिक आहार और ताजे पानी की सुविधा प्रदान की जाती है। यहां जैविक और प्राकृतिक आहार पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
3. चिकित्सा सुविधाएँ:
नियमित रूप से पशु चिकित्सकों द्वारा गायों की जांच और इलाज किया जाता है। बीमार या घायल गायों के लिए विशेष चिकित्सा इकाई भी उपलब्ध है।
4. प्रजनन कार्यक्रम:
स्वस्थ प्रजनन के लिए विशेष प्रजनन कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
5. जैविक खेती:
गौशाला में गोबर और गोमूत्र का उपयोग करके जैविक खाद बनाई जाती है, जो स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराई जाती है।
6. गौशाला उत्पाद:
गोबर से बने उत्पाद जैसे गोबर के कंडे, जैविक खाद, और गोमूत्र आधारित कीटनाशक यहां तैयार किए जाते हैं।
7. शिक्षा और जागरूकता:
स्थानीय समुदाय और आगंतुकों के लिए गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, और जैविक खेती पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
8. पर्यावरण संरक्षण:
गौशाला में वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसी पर्यावरणीय पहलें चलाई जाती हैं।
सामाजिक और धार्मिक महत्व
गौशाला न केवल एक पशु संरक्षण स्थल है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र है। यहां नियमित रूप से पूजा, हवन, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, यह स्थान सामाजिक सेवा के कार्यों जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के लिए भी जाना जाता है।
आगंतुकों के लिए जानकारी
विजिटिंग समय:
आगंतुकों के लिए गौशाला खुली रहती है, विशेषकर धार्मिक और सामाजिक कार्यों के दौरान।
संपर्क जानकारी: आगंतुकों और दानदाताओं के लिए संपर्क नंबर 9352513732 और ईमेल आईडी उपलब्ध हैं, जिससे वे आसानी से संपर्क कर सकते हैं।
स्वयंसेवा:
गौशाला में स्वयंसेवा के लिए इच्छुक लोग आवेदन कर सकते हैं और गौसेवा में भाग ले सकते हैं।
संपर्क _ gaushalanewai@gmail.com
संचालन का आर्थिक आधार
गौशाला का संचालन मुख्य रूप से गौ माता की पंचगव्य आधारित उत्पादन सरकारी अनुदान और स्वयंसेवकों के सहयोग से होता है। यहां दान देने के विभिन्न तरीके उपलब्ध हैं, जिनमें ऑनलाइन दान, नकद दान, और सामग्री दान शामिल हैं। इसके अलावा, गौशाला विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर भी काम करती है।
संत श्री आशाराम जी गौशाला निवाई न केवल गायों के संरक्षण और देखभाल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह समाज में पर्यावरणीय जागरूकता और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी समर्पित है। इस गौशाला का दर्शन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ की गतिविधियाँ और पहलें न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
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